Uttarakhand
30 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य में उत्तराखंड बन सकता है रोल मॉडल, लेकिन चुनौतियां भी बड़ी
देहरादून। भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों की भूमिका अहम हो सकती है। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में तेज रफ्तार पकड़ी है और राज्य की GSDP करीब पांच साल में 2.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.82 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
हालांकि आर्थिक विकास के साथ राज्य के सामने कई चुनौतियां भी हैं। बढ़ता कर्ज, ब्याज का बोझ और पहाड़-मैदान के बीच आर्थिक असमानता उत्तराखंड के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। ऐसे में आने वाले वर्षों में राज्य को ऐसी विकास रणनीति की जरूरत होगी, जिसमें आर्थिक वृद्धि के साथ वित्तीय अनुशासन और संतुलित विकास पर भी जोर दिया जाए।
पांच साल में 2.5 लाख करोड़ से 3.82 लाख करोड़ पहुंची GSDP
अर्थशास्त्री राजेंद्र बिष्ट के मुताबिक उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था फिलहाल करीब 7 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रही है। यह राष्ट्रीय GDP की औसत वृद्धि दर के आसपास है। उनके अनुसार 2047 तक भारत की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्यों को अपनी आर्थिक विकास दर बढ़ानी होगी।
छोटे राज्यों के लिए इसमें बड़ी संभावनाएं हैं, क्योंकि इनका आर्थिक आधार अपेक्षाकृत छोटा होता है। ऐसे में सही रणनीति और निवेश के जरिए इन राज्यों में तेज विकास की गुंजाइश रहती है। राजेंद्र बिष्ट का मानना है कि उत्तराखंड को आने वाले वर्षों में अपनी सालाना GSDP ग्रोथ को 11 से 12 फीसदी तक ले जाने का प्रयास करना होगा। यह चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है। राज्य पहले भी कुछ अवधियों में 8 से 10 फीसदी तक की आर्थिक वृद्धि दर्ज कर चुका है।
पर्यटन में हाई एंड सेगमेंट बन सकता है ग्रोथ इंजन
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन पहले से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन, मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और अन्य पर्यटन स्थल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं।
लेकिन अब केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। अर्थशास्त्री राजेंद्र बिष्ट के मुताबिक राज्य को हाई वैल्यू टूरिज्म पर ध्यान देना होगा, यानी ऐसे पर्यटकों को आकर्षित करना होगा जो लंबे समय तक रुकें और स्थानीय अर्थव्यवस्था में ज्यादा खर्च करें।
इसके लिए लग्जरी टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म और इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सकता है।
टिहरी झील को ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी
पर्यटन के क्षेत्र में टिहरी झील एक बड़े अवसर के रूप में सामने आ रही है। पर्यटन सचिव के मुताबिक टिहरी झील और आसपास के क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसके तहत करीब 100 गांवों को एक बड़े पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
टिहरी को केवल एक पर्यटन स्थल के बजाय व्यापक पर्यटन इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाता है तो इसका फायदा होटल, होमस्टे, परिवहन, स्थानीय उत्पाद, एडवेंचर एक्टिविटी और दूसरे सेवा क्षेत्रों को मिल सकता है।

ग्रीन एनर्जी में बड़ी संभावनाएं
उत्तराखंड के लिए ग्रीन एनर्जी भी भविष्य का एक बड़ा आर्थिक क्षेत्र बन सकती है। राज्य में हाइड्रोपावर की संभावनाओं पर लंबे समय से काम होता रहा है। इसके अलावा सोलर एनर्जी को भी बढ़ावा देकर ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
हालांकि हिमालयी पारिस्थितिकी को देखते हुए ऊर्जा विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी होगा। उत्तराखंड के लिए ऐसा मॉडल विकसित करना चुनौती होगी, जिसमें ऊर्जा उत्पादन बढ़े लेकिन प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ कर्ज भी बड़ी चुनौती
आर्थिक विकास के बीच उत्तराखंड के सामने सबसे बड़ा सवाल वित्तीय संसाधनों का है। विकास परियोजनाओं के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ता है और इसके साथ ब्याज का बोझ भी बढ़ता है।
अर्थशास्त्री राजेंद्र बिष्ट के मुताबिक राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन लगातार बढ़ता कर्ज और उस पर लगने वाला ब्याज भविष्य के लिए चुनौती है।
इसलिए राज्य को आर्थिक विकास के साथ अपने राजस्व स्रोतों को मजबूत करने और ऐसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की जरूरत होगी, जो भविष्य में रोजगार के साथ सरकार के लिए अतिरिक्त राजस्व भी पैदा कर सकें।
पहाड़ और मैदान के बीच आर्थिक असमानता चिंता
उत्तराखंड की विकास यात्रा में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पहाड़ और मैदान के बीच आर्थिक अंतर है।
डेटा एनालिस्ट अनूप नौटियाल के मुताबिक राज्य के 25 वर्षों के आर्थिक सफर में GSDP और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन आर्थिक गतिविधियों का वितरण समान नहीं है।
वर्तमान में उत्तराखंड की GSDP का करीब 70 फीसदी हिस्सा चार मैदानी जिलों—हरिद्वार, उधम सिंह नगर, देहरादून और नैनीताल से आता है। वहीं बाकी नौ पर्वतीय जिलों की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी के आसपास है।
सीमावर्ती पर्वतीय जिलों में आर्थिक गतिविधियों का स्तर अपेक्षाकृत कम होना भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में राज्य के विकास मॉडल में पर्वतीय क्षेत्रों को ज्यादा आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
इन सेक्टरों में छिपी हैं विकास की संभावनाएं
उत्तराखंड को 2047 के आर्थिक लक्ष्य में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए कई नए क्षेत्रों पर फोकस करना होगा। इनमें प्रमुख रूप से:
- हाई वैल्यू टूरिज्म और लग्जरी टूरिज्म
- एडवेंचर और इको-टूरिज्म
- हाइड्रो और सोलर आधारित ग्रीन एनर्जी
- हॉर्टिकल्चर और ऑर्गेनिक फार्मिंग
- फूड प्रोसेसिंग
- आयुष और वेलनेस
- फार्मा सेक्टर
- IT और डिजिटल सेवाएं
- स्टार्टअप और नए बिजनेस मॉडल
इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।
2047 के लिए ग्रोथ के साथ वित्तीय अनुशासन जरूरी
उत्तराखंड के सामने आने वाले वर्षों में दोहरी चुनौती है। एक तरफ राज्य को देश की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तेज आर्थिक वृद्धि हासिल करनी होगी, वहीं दूसरी तरफ कर्ज और ब्याज के बोझ को नियंत्रित करना होगा।
इसके लिए सरकारी खर्च को ऐसे क्षेत्रों में केंद्रित करना जरूरी होगा, जहां लंबे समय में रोजगार, निवेश और राजस्व पैदा हो सके। साथ ही पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधनों और स्थानीय लोगों को विकास से जोड़ना होगा।

उत्तराखंड बन सकता है छोटे राज्यों के लिए मॉडल
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था ने पिछले वर्षों में अच्छी वृद्धि दिखाई है, लेकिन 2047 की बड़ी आर्थिक तस्वीर में राज्य की सफलता केवल GSDP बढ़ने से तय नहीं होगी।
असल चुनौती ऐसी टिकाऊ और संतुलित अर्थव्यवस्था तैयार करने की है, जिसमें निवेश और रोजगार बढ़े, पहाड़ और मैदान के बीच आर्थिक अंतर कम हो, सरकार के अपने राजस्व स्रोत मजबूत हों और विकास के लिए लिया गया कर्ज भविष्य की कमाई बढ़ाने में मदद करे।
अगर उत्तराखंड पर्यटन, ग्रीन एनर्जी, हॉर्टिकल्चर, आयुष, IT और अन्य नए आर्थिक क्षेत्रों को मजबूती देता है और साथ ही वित्तीय अनुशासन बनाए रखता है, तो छोटा राज्य होने के बावजूद 2047 तक भारत की 30 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य में उत्तराखंड एक प्रभावी रोल मॉडल बन सकता है।
