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Uttarakhand

माल्टा महोत्सव में हुई 7000 किलो माल्टा की बिक्री,महोत्सव के माध्यम से वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा

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माल्टा महोत्सव में हुई 7000 किलो माल्टा की बिक्री,महोत्सव के माध्यम से वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा

माल्टा महोत्सव में हुई 7000 किलो माल्टा की बिक्री

माल्टा से निर्मित जूस, जैम, स्क्वैश, कैंडी जैसे उत्पादों की भी हुई सफल बिक्री

सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन के तत्वावधान में महोत्सव का आयोजन

महोत्सव के माध्यम से वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा

देहरादून: आईटीबीपी स्टेडियम, सीमा द्वार में सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय माल्टा महोत्सव ने पर्वतीय किसानों के लिए एक प्रभावशाली और सशक्त मंच उपलब्ध कराते हुए आत्मनिर्भरता, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। इस महोत्सव में चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल सहित प्रदेश के समस्त पर्वतीय अंचलों से आए माल्टा उत्पादक किसानों ने सहभागिता की। किसानों द्वारा उत्पादित 7000 किलोग्राम से अधिक माल्टा तथा उससे निर्मित जूस, जैम, स्क्वैश, कैंडी जैसे विविध मूल्यवर्धित उत्पादों की सफल बिक्री हुई, जिससे उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ और उनके आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।

फाउंडेशन की ट्रस्टी गीता धामी जी ने कहा कि यह आयोजन मात्र एक महोत्सव नहीं, बल्कि पर्वतीय किसानों की मेहनत को सम्मान देने, उनकी आजीविका को मजबूती प्रदान करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस, दूरदर्शी एवं संवेदनशील पहल है। उन्होंने कहा कि माल्टा जैसे स्थानीय उत्पादों को सशक्त बाज़ार उपलब्ध कराकर फाउंडेशन किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और किसानों को उनकी उपज का वास्तविक मूल्य प्राप्त होता है। फाउंडेशन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि इस बिक्री से प्राप्त समस्त धनराशि को पुनः किसान कल्याण, उत्पाद संवर्धन, प्रशिक्षण एवं विपणन से जुड़े कार्यों में लगाया जाएगा, ताकि यह पहल केवल एक आयोजन तक सीमित न रहकर दीर्घकालिक रूप से किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सके।

सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन ने इस आयोजन के माध्यम से वोकल फॉर लोकल की भावना को केवल नारे तक सीमित न रखते हुए उसे धरातल पर उतारने का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया। साथ ही सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए फाउंडेशन की ओर से अनाथ आश्रमों में माल्टा भिजवाया गया, ताकि स्थानीय किसानों की मेहनत से उपजे फल का लाभ समाज के वंचित वर्गों तक भी पहुँच सके। यह पहल फाउंडेशन की मानवीय सोच, सामाजिक संवेदनशीलता और समर्पित कार्यशैली को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है।

महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान, उपभोक्ता और आम नागरिकों की सहभागिता देखने को मिली। उत्कृष्ट बिक्री, उत्साहजनक जनसहभागिता और सकारात्मक प्रतिक्रियाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि पर्वतीय उत्पादों को सही मंच, मार्गदर्शन और बाज़ार उपलब्ध कराया जाए, तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकते हैं। ट्रस्टी गीता धामी जी के मार्गदर्शन एवं सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन के सतत और समर्पित प्रयासों से आयोजित यह माल्टा महोत्सव निस्संदेह उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों के लिए आशा, सम्मान और आत्मनिर्भर भविष्य का प्रतीक बनकर उभरा है।



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