Uttarakhand
किसान की आत्महत्या के बाद गरमाया मामला, परिजनों ने सरकार के सामने रखी ये मांगे
काशीपुर: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के काठगोदाम थाना क्षेत्र में एक होटल में किसान सुखदेव सिंह ने आत्महत्या कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। जिसके बाद अब शव को उनके पैतृक नगर काशीपुर ले जाया जा चुका है। शव के पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया जिसके बाद बड़ी संख्या में किसान, रिश्तेदार और स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठे हो गए। परिजनों ने सरकार और प्रशासन को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
काशीपुर के किसान की आत्महत्या के बाद गरमाया मामला
नैनीत्तल जिले के काठगोदाम गौलापार स्थित एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने वाले किसान का शव कल देर शाम काशीपुर पहुंचा। जिसके बाद मृतक के घर पर लोगों का जमावड़ा लग गया। भारी संख्या में किसान भी उनके घर के बाहर एकत्रित हुए। इस दौरान परिजनों ने सरकार के सामने तीन मांगें रखते हुए कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने उनकी मांगों पर अम्ल नहीं किया तो वो एक बड़ा आंदोलन करेंगे।
आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
मृतक ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बना कर कुछ लोगों और अधिकारीयों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया था। अब परिजनों का कहना है कि मृतक द्वारा बनाई गई इस वीडियो को ठोस सबूत (एविडेंस) माना जाए। इसके साथ ही मृतक ने वीडियो में जिन अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
मृतक के परिवार को ठगी की रकम लौटाई जाए
अगली मांग में परिजनों और किसानों ने आरोप लगाया कि मृतक सुखदेव सिंह के साथ कुछ ठगों ने बड़ी ठगी की थी। जिससे वो मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गए थे। परिजनों ने मांग उठाई कि ठगी करने वाले आरोपियों की संपत्तियां कुर्क कर बेच दी जाएं। उसके बाद मृतक से ठगी कि गई पूरी रकम मृतक के परिवार को वापस दिलाई जाए।
परिजनों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
इसके आलावा किसानो और परिजनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन को इन मांगों पर कार्रवाई के लिए आज दोपहर 12 बजे तक का समय दिया गया है। अगर तय समय सीमा के अंदर कोई ठोस निर्णय और कार्रवाई नहीं होती है, तो वो मृतक का शव थाना आईटीआई में रखकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
बता दें कि मुख्यमंत्री धामी ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए है। जांच कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी गई है। लेकिन बावजूद इसके किसानों और परिजनों में आक्रोश दिख रहा है।
