Madhya Pradesh

madhya pradesh 50th khajuraho dance festival registered in guinness book of world records – खजुराहो नृत्य महोत्सव में एक साथ 1484 कलाकारों का डांस, कायम हुआ वर्ल्ड रिकॉर्ड

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मध्य प्रदेश के 50वें खजुराहो नृत्य महोत्सव में राग बसंत की लय पर 1484 कथक कलाकारों के थिरकते कदमों ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खजुराहो महोत्सव (खजुराहो नृत्य महोत्सव) का बहुत गौरवशाली इतिहास है। आज इसकी स्वर्ण जयंती के अवसर पर मुझे महोत्सव में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में ‘राग बसंत’ की लय पर नृत्य करते हुए 1,484 कथक कलाकारों ने मंगलवार को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। यह रिकॉर्ड राज्य सरकार द्वारा आयोजित 50वें खजुराहो नृत्य महोत्सव के उद्घाटन दिवस पर बना।

वहीं गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से जारी एक प्रमाण पत्र में कहा गया है कि 20 फरवरी को 50वें खजुराहो नृत्य महोत्सव के दौरान मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की ओर से सबसे बड़ा कथक नृत्य का आयोजन हुआ। इस उपलब्धि के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खजुराहो में आदिवासी और लोक कलाओं के प्रशिक्षण के लिए देश का पहला गुरुकुल स्थापित करने की घोषणा की।

सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे भारत में सांस्कृतिक पुनरुत्थान का उत्सव मनाया जा रहा है। इसी श्रृंखला में भगवान नटराज महादेव को समर्पित यह साधना भारतीय संस्कृति का गौरव बनेगी और भावी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नृत्य और पूजा ईश्वर की आराधना का मार्ग है। यह भगवान से सीधे संपर्क का एक पवित्र माध्यम है। सीएम यादव ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम होने के लिए प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए नृत्य गुरुओं और आयोजन में भाग लेने वाले कलाकारों को बधाई दी।

सीएम ने कहा- मैं देश भर के उन नर्तकों को हार्दिक बधाई देता हूं जिन्होंने भाग लिया और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया। प्रसिद्ध नृत्य गुरु राजेंद्र गंगानी की कोरियोग्राफी में प्रदेश के विभिन्न शहरों से आये कलाकारों ने राग बसंत पर 20 मिनट की शानदार प्रस्तुति दी। 

 

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि खजुराहो में आदिवासी और लोक कलाओं के प्रशिक्षण के लिए देश का जो पहला गुरुकुल स्थापित होगा। उसकी परिकल्पना ऐसी होगी ताकि ग्रामीण जीवन के साथ-साथ पारंपरिक कौशल और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की रक्षा की जा सके। इससे प्राचीन भारतीय विरासत का भी विस्तार होगा। गौरतलब है कि डेढ़ महीने पहले ग्वालियर में तानसेन समारोह के तहत ताल दरबार कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें एक साथ 1282 तबला वादकों ने प्रस्तुति दी थी। इसे भी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली थी।



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