Connect with us

Uttarakhand

लोक भवन में धूमधाम से मनाई गई हरियाली तीज, दीपिका राणा बनीं ‘तीज क्वीन’

Published

on

लोक भवन में धूमधाम से मनाई गई हरियाली तीज, दीपिका राणा बनीं ‘तीज क्वीन’

Dehradun News: देहरादून स्थित लोक भवन में शुक्रवार को हरियाली तीज का पर्व पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में लोक भवन में कार्यरत महिला अधिकारी एवं कर्मचारी और अधिकारियों की धर्मपत्नियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस दौरान महिलाओं ने विभिन्न सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर तीज के उत्सव को यादगार बना दिया।

प्रथम महिला गुरमीत कौर ने दी तीज की शुभकामनाएं

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रथम महिला गुरमीत कौर ने सभी महिलाओं को हरियाली तीज की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महिलाओं के जीवन में सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने हरियाली तीज के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तीज भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा, नारी शक्ति की आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ आपसी सौहार्द, सहभागिता और सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं।

नृत्य और संगीत से सजा तीज समारोह

लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने मनमोहक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों में सावन और हरियाली तीज के उल्लास की खूबसूरत झलक देखने को मिली।

महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में हिस्सा लेकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। लोकगीतों, नृत्य और अन्य उत्सवी गतिविधियों के जरिए तीज की पारंपरिक संस्कृति को जीवंत किया गया।

दीपिका राणा बनीं ‘तीज क्वीन’

हरियाली तीज के अवसर पर विशेष तीज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

प्रतियोगिता में श्रीमती दीपिका राणा ने ‘तीज क्वीन’ का खिताब अपने नाम किया। वहीं श्रीमती सपना चौधरी ने दूसरा और श्रीमती मोहिनी ने तीसरा स्थान हासिल किया।

प्रथम महिला गुरमीत कौर ने विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

पारंपरिक रंगों में नजर आया लोक भवन

कार्यक्रम के दौरान लोक भवन में हरियाली तीज की पारंपरिक छटा देखने को मिली। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर लोकगीतों और नृत्य के माध्यम से सावन के उत्सव को जीवंत किया।

इस आयोजन ने न केवल महिलाओं को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर दिया, बल्कि आपसी मेलजोल और सहभागिता की भावना को भी मजबूत किया।



Source link

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement