Uttarakhand

4 मार्च से देहरादून में शुरू होगा दून बुक फेस्टिवल 2026, गढ़वाली और कुमांउनी समेत कई भाषाओं की लाखों पुस्तकें होंगी प्रदर्शित

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DEHRADUN NEWS: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एक बार फिर साहित्य और संस्कृति के रंगों से सराबोर होने जा रही है, यहां 4 से 12 अप्रैल तक परेड ग्राउंड में दून बुक फेस्टिवल 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव शिक्षा मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

4 अप्रैल से शुरू होगा दून बुक फेस्टिवल 2026

दरअसल, ये आयोजन केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि विचारों, रचनात्मकता और सांस्कृतिक विविधता का भी उत्सव बनेगा। इस संबंध में नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक युवराज मलिक ने बताया कि यह मंच देशभर के पाठकों, लेखकों, कलाकारों और विचारकों को एक साथ जोड़ने का कार्य करेगा।

लिटरेचर फेस्टिवल बनेगा आकर्षण का केंद्र 

इसके साथ ही, महोत्सव के दौरान विभिन्न गतिविधियों की भरमार रहेगी, जिससे हर आयु वर्ग के लोगों को कुछ नया अनुभव करने का अवसर मिलेगा। खासतौर पर बच्चों के लिए प्रतिदिन “चिल्ड्रन फेस्टिवल” आयोजित किया जाएगा, जिसमें स्टोरी टेलिंग सेशन, रचनात्मक कार्यशालाएं, क्विज और इंटरएक्टिव लर्निंग एक्टिविटीज शामिल होंगी। वहीं, साहित्य प्रेमियों के लिए लिटरेचर फेस्टिवल आकर्षण का केंद्र रहेगा, जहां वे अपने पसंदीदा लेखकों से सीधे संवाद कर सकेंगे। इसके साथ ही, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और म्यूजिकल कॉन्सर्ट भी इस आयोजन को और अधिक जीवंत बनाएंगे।

9 दिनों तक चलेगा कार्यक्रम 

इसी कड़ी में, इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण “दून साहित्य उत्सव” होगा, जिसमें प्रसिद्ध लेखक, फिल्मकार और विचारक पैनल डिस्कशन और इंटरएक्टिव सेशनों के जरिए अपनी बात रखेंगे। साथ ही, नौ दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में गढ़वाली और कुमाऊंनी समेत कई भाषाओं की लाखों पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण के लिए विशेष पहल की है, जिसके तहत पिछले वर्ष आयोजित कार्यशाला के बाद कई बाल कहानियों और साहित्यिक कृतियों का गढ़वाली और कुमाऊंनी में अनुवाद किया गया। परिणामस्वरूप, 13 नई पुस्तकों को तैयार किया गया है, जिन्हें इस महोत्सव में औपचारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा। इस भव्य आयोजन का उद्घाटन 4 अप्रैल को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाएगा, जबकि पुस्तक प्रेमियों के लिए इसमें प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रहेगा।

 



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