Uttarakhand
मसूरी में भूमाफिया कर रहे क़ानून की अनदेखी, बिना अनुमति सात पेड़ों पर चलाई आरी
मसूरी: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के मसूरी में भू-माफिया अब कानून को खुलेआम चुनौती देने लगे हैं। ताजा मामला मसूरी के कंपनी गार्डन के निकट कंडी लॉज हालोक रोड से सामने आय है। जहाँ पर भू-माफियाओं ने रातों-रात सात बहुमूल्य पेड़ों को अवैध तरीके से काट दिया है। इस प्रकार की घटना न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि शासन-प्रशासन के लिए भी चुनौतीपूर्ण है।
वन विभाग की अनुमति के बिना मसूरी में पेड़ों का अवैध कटान
भूमि स्वामी ने बिना वन विभाग की अनुमति के सात पेड़ों को अवैध रूप से काटा है। इन कटे हुए पेड़ों में खाखसी, कौल, मंसूरा और भमोरा जैसी संरक्षित और बहुमूल्य प्रजातियां शामिल हैं। इन पेड़ों का पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम् योगदान होता है। जांच के दौरान भूमि स्वामी का नाम हरप्रीत सिंह, निवासी जीएमएस रोड सामने आया है। वन विभाग ने हरप्रीत सिंह के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

ये कृत्य भारतीय वन अधिनियम,1927 के मुताबिक दंडनीय अपराध
वन विभाग के मुताबिक भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत बिना अनुमति पेड़ काटना दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर जुर्माने और लकड़ी की जब्ती और कारावास तक का प्रावधान है। साथ ही संरक्षित प्रजातियों के कटान पर सजा और भी कठोर हो जाती है। मौके पर वन विभाग को 11 जगहों पर गड्डे भी दिखे हैं, बताया जा रहा है कि इन्हें भू-स्वामियों द्वारा निर्माण के लिए खोदा गया है।
वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए सभी गड्ढों को भरवा दिया है ताकि इस पर कोई भी अवैध निर्माण न किया जा सके।
रेंजर अधिकारी महेंद्र चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
मसूरी एक अत्यंत संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र है, इसलिए यहां किसी भी तरह की अवैध कटान या अनधिकृत निर्माण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भू-माफियाओं के विरुद्ध वन विभाग कठोर कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी घटना के बाद स्थानीय लोगों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिला है। उनका कहना है कि अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो मसूरी की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता गंभीर खतरे में पड़ सकती है।
– रेंजर अधिकारी महेंद्र चौहान
