Uttarakhand

देहरादून जौनसार-बावर क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली की धूम, होले (मशालों ) के साथ इको फ्रेंडली दिवाली

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विकासनगर: देहरादून जनपद के विकासनगर-जौनसार बावर क्षेत्र मे बूढ़ी दिवाली के रंग में डूबा हुआ है। लोकगीतों और ढोल दमाऊं की धुन पर लोग जमकर थिरक रहे हैं। हाथों में होले (मशालें) जलाकर बूढ़ी दीपावली का शुभारम्भ किया गया। कई खत पट्टियों में बूढ़ी दीपावली मनाई जा रही है।

त्यूणी तहसील के पुटाड़ गाँव में 30 वर्षों बाद मनाई जा रही बूढ़ी दिवाली

इस बार त्यूणी तहसील के बावर-शिलगांव के पुटाड़ में शिरगुल महाराज विराजमान हैं। गांव के स्याणा मदन डोभाल ने कहा कि बूढी दिवाली के इस शुभ अवसर पर हर्षोल्लाष के साथ मशालें जलाकर रात भर हारुल, तांदी गीतों की धूम रही। तहसील के पुटाड़ गांव में 30 सालों बाद बूढ़ी दिवाली का शुभारंभ कल से हो चुका है।

इस वर्ष शिरगुल महाराज 1 वर्ष की बरवांश पूजा अर्चना के लिए गाँव में विराजमान हैं। इसलिए लोक पर्व और भी खास बन गया। वैसे तो क्षेत्र में अन्य जगहों की तरह ही कार्तिक अमावस्या को ही दिवाली मनाई जाती है लेकिन इस वर्ष खत क्षेत्र में शिरगुल महाराज के विराजमान होने से बूढ़ी दिवाली का ये लोक पर्व ख़ास बन गया है।

पर्यावरण और सामाजिक एकता को भी बड़ावा देती है बूढ़ी दिवाली

जहाँ एक और दिवाली की आतिशबाजियों से हर वर्ष प्रदूषण बढ़ जाता है। वहीं जन-जातीय समाज की ये दिवाली इको फ्रेंडली और सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देती है। जिसमें गाँव से बाहर गए नौकरी पेशा लोग भी घर पहुँच कर पंचायती चौक में हाथों में होले लिए दिवाली का उत्सव मानते हैं। ढोल दमाऊं और लोकगीतों की धुन के साथ पांच दिनों तक मनाया जाता है बूढ़ी दिवाली का ये लोक पर्व।





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