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दून ऑटो रिक्शा यूनियन का सीएम आवास कूच
दून ऑटो रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने बताया कि पिछले 55 वर्षों से ऑटो चालक देहरादून के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य प्रमुख स्थलों पर अपने वाहनों को खड़ा करते आए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने ये भी कहा कि नगर निगम ने इन स्थानों पर यूनियन के लिए विशेष रूप से स्टैंड चिन्हित किए हैं। इसके अलावा, पंकज अरोड़ा ने कहा कि देहरादून के ऑटो चालक हमेशा से ही बाहर से आए पर्यटकों और सैलानियों के लिए डोर-टू-डोर सेवा प्रदान करते आए हैं, साथ ही उनका सामान सुरक्षित रूप से पहुंचाने का कार्य भी करते हैं।
दून ऑटो रिक्शा यूनियन द्वारा सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगे रखीं गई
- निजी नंबर प्लेट पर चल रहे दोपहिया वाहन लंबे समय से ऑनलाइन माध्यम से वाणिज्यिक गतिविधियां कर रहे हैं। इससे सीएनजी ऑटो रिक्शा चालकों के रोजगार पर सीधा और गंभीर असर पड़ रहा है, इसलिए ऐसे वाहनों पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
- शहर में इलेक्ट्रॉनिक ऑटो और ई-रिक्शाओं की संख्या जरूरत से कहीं अधिक हो चुकी है। इसके कारण पारंपरिक सीएनजी ऑटो चालकों को सवारी नहीं मिल पा रही है और ट्रैफिक दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में नए ई-ऑटो/ई-रिक्शाओं का रजिस्ट्रेशन कम से कम 10 वर्षों के लिए बंद किया जाना आवश्यक है।
- ऑटो रिक्शा (3+1) परमिट की वर्तमान 25 किलोमीटर सीमा को बढ़ाकर 40 किलोमीटर किया जाए या फिर ऑटो चालकों को जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक सवारी ले जाने की अनुमति दी जाए।
- वर्तमान में ई-रिक्शा मुख्य मार्गों पर संचालित हो रहे हैं, जबकि शासन के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार इन्हें मोहल्लों की आंतरिक गलियों तक सीमित किया जाना चाहिए। इस विषय में कई बार प्रशासन से वार्ता के बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
- देहरादून जनपद में फिटनेस सेंटर को शहर के केंद्र में स्थापित किया जाए या उसकी व्यवस्था को बेहतर किया जाए। साथ ही आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त फिटनेस सेंटर भी खोले जाएं।
- इलेक्ट्रॉनिक ऑटो और ई-रिक्शा के क्रय-विक्रय एवं रजिस्ट्रेशन के समय मूल निवास प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र और वैध ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य किए जाएं। वाहन बेचने या खरीदने वाला चालक उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना चाहिए।
ऑटो रिक्शा यूनियन ने सरकार को प्रशासन के जरिए मांगपत्र सौंपा। जिसके साथ ही यूनियन द्वारा उनकी मांगों पर गौर न करने पर चक्का जाम करने की चेतावनी दी गई है।