Uttarakhand
ज्योलिकोट में लापरवाही पर 6 कर्मचारी निलंबित, उत्तराखंड पेयजल निगम के मुख्य अभियंता कोर्ट में हुए पेश
नैनीताल : नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और उसके आसपास के गांवों गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल में दूषित पेयजल के कारण फैली जल जनित बीमारियों के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। नैनीताल जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबन्धक और उत्तराखंड पेयजल निगम (कुमाऊं मंडल) के मुख्य अभियंता आज व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए।
उत्तराखंड पेयजल निगम के मुख्य अभियंता कोर्ट में हुए पेश
आज हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि पेयजल व्यवस्था में बरती गई लापरवाही, जल स्रोतों की समय पर सफाई न कराने , पेयजल गुणवत्ता जांच में शिथिलता बरतने और प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई न करने के आरोप में उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के 6 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिसमे जल संस्थान के प्रभारी अधीक्षण अभियंता , सहायक अभियंता और अपर सहायक अभियंता रविंद्र को निलंबित किया गया है।
ज्योलिकोट में लापरवाही पर 6 कर्मचारी निलंबित
पेयजल निगम स्तर पर प्रभारी अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता दीपांशु शर्मा को पेयजल व्यवस्था से जुड़ी लापरवाही के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। आपको बता दें कि पिछले तीन महीनों से क्षेत्र में डायरिया और पीलिया जैसी बीमारियां फैलने, दो लोगों की मौत होने और बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने के मामले को लेकर बेलुवाखान निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट ने जनहित याचिका दायर की। याचिका में मामले का उल्लेख करते हुए विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता का मुद्दा उठाया गया तथा प्रभावितों के नि:शुल्क इलाज व स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की गई।