
चारधाम यात्रा से पहले मंगलवार को बद्री केदार मंदिर समिति के बजट बैठक आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता BKTC के अध्यक्ष हेमंत दिवेदी ने की। बैठक में BKTC की नियमावली में संशोधन कर निर्णय लिया गया कि अब BKTC से जुड़े मंदिरों में अब गैर संतनियों का प्रवेश वर्जित रहेगा। इसके बाद इस मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है।
केदारनाथ और बद्रीनाथ में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक
मंगलवार को हुई बद्री केदार मंदिर समिति के बजट बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। अब केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ झाम समेत उत्तराखंड के 47 मंदिरों में गैर सनातनियों को एंट्री नहीं मिलेगी। लेकिन अब इस फैसले को लेकर प्रदेश में घमासान भी मच गया है। कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि ये मंदिर समिति के अध्यक्ष और भाजपा सरकार का सामाजिक सोहार्द को बिगाड़ने का एजेंडा है। उन्होंने इस फैसले को पूरी तरह से राजनैतिक बताते हुए कहा कि इससे देशभर में समाजिक ढांचा खराब होगा और अराजकता फैलेगी।
उन्होंने कहा कि हर आदमी अपनी सीमाएं जानता है चाहे वो किसी भी धर्म का हो। लेकिन इस तरीके से नियमावली बदलकर किसी समुदाय को टार्गेट करना उचित नहीं है। साथ ही उनका कहना था कि बीजेपी और मंदिर समिति कैसे निर्णय लेगी कि गैर सनातनी कौन हैं। जिनके लिए ये प्रवेश वर्जित किया गया है। क्यों कि देश विदेश से लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए आते हैं।
अराजकता फैलाने वालों और तुष्टिकरण करने वालों का बहिष्कार
इस पूरे मामले पर बीजेपी कि और से भी जवाब आया है। बीजेपी प्रवक्ता जपेंद्र कुंवर ने बताया कि गैर सनातनी से आशय ऐसे लोगों से है जो सनातन में विश्वास नहीं रखते हैं, और जो सनातन का सम्मान नहीं करते हैं। ऐसे जो लोग सनातन परंपरा को बार बार आघात पहुंचाते हैं। उन्हें मंदिर परिसर में खुद भी नहीं जाना चाहिए। उन्होंने इस फैसले को जनहित में बताते हुए कहा कि ये अराजकता फैलाने वालों और तुष्टिकरण करने वालों का बहिष्कार है। बाकी सनातन परंपरा का सम्मान करने वाला कोई भी व्यक्ति वह किसी भी वर्ग का हो मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना कर सकता है।