Uttarakhand
उत्तराखंड में तपोवन विष्णुगाड़ Hydro Project पर खतरा! टनल में पानी-मलबे का रिसाव, सुरक्षा कारणों से काम रोका
चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में एनटीपीसी की निर्माणाधीन तपोवन विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना की सुरंग में पानी के साथ मलबा आने के बाद निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरंग में काम कर रहे श्रमिकों और कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया है।
घटना के बाद जिला प्रशासन ने भी एनटीपीसी से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। वहीं, परियोजना प्रबंधन का कहना है कि सुरंग निर्माण के दौरान इस तरह की स्थिति सामने आना असामान्य नहीं है।
सुरंग में दिखाई दी कैविटी
एनटीपीसी के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह जयाड़ा के मुताबिक, 15 अगस्त की सुबह सुरंग के भीतर कैविटी दिखाई दी थी। इसके बाद कैविटी से लगातार पानी और मलबा आने लगा।
यह सुरंग तपोवन से हेलंग तक बनाई जा रही मुख्य सुरंग से जुड़ी एडिट टनल है, जहां फिलहाल निर्माण कार्य चल रहा था। इस हिस्से में तीन दर्जन से अधिक श्रमिक और कर्मचारी काम कर रहे थे। पानी और मलबे के रिसाव को देखते हुए एनटीपीसी ने एहतियातन सभी श्रमिकों को सुरंग से बाहर निकाल लिया और काम रोक दिया।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों में नाराजगी
सुरंग में पानी और मलबा आने की घटना के बाद स्थानीय लोगों और कर्मचारियों में चिंता बढ़ गई है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि यह इलाका पहले भी बड़ी आपदा का सामना कर चुका है।
परियोजना प्रबंधन की ओर से इस तरह के रिसाव को निर्माण प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताए जाने पर भी कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
2021 की जलप्रलय में तबाह हुआ था इलाका
तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना का नाम 7 फरवरी 2021 की ऋषिगंगा जलप्रलय से भी जुड़ा है। रौंठी ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों में अचानक बाढ़ आ गई थी।
इस आपदा में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह हो गया था। वहीं, तपोवन स्थित एनटीपीसी परियोजना के बैराज और मुख्य सुरंग में भी बड़े पैमाने पर मलबा और पानी भर गया था।
इस हादसे में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और कई लोग लापता हुए थे। आपदा के बाद परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा और निर्माण कार्य लंबे समय तक प्रभावित रहा।
पहले भी सुरंग में हो चुका है पानी का रिसाव
तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना की सुरंगों में पानी आने की समस्या नई नहीं है। दिसंबर 2009 में झड़कुला क्षेत्र की TBM साइट पर चट्टान गिरने के बाद प्राकृतिक जलस्रोत फूट गया था। उस समय सुरंग में बड़ी मात्रा में पानी का रिसाव शुरू हो गया था।
बताया जाता है कि इस घटना के बाद परियोजना का काम लंबे समय तक प्रभावित रहा। इसके बाद वर्ष 2012 में भी सुरंग में पानी रिसने की घटना सामने आई थी।
इसके बाद परियोजना से जुड़ी एलएनटी कंपनी ने काम छोड़ दिया था। झड़कुला साइट पर इस्तेमाल की जा रही TBM मशीन के सुरंग के भीतर फंसे होने की बात भी सामने आती रही है।

प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
फिलहाल ताजा घटना के बाद सुरंग में निर्माण कार्य रोक दिया गया है और श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। जिला प्रशासन ने एनटीपीसी से घटना की स्थिति और सुरक्षा उपायों को लेकर रिपोर्ट मांगी है।
अब निगाह इस बात पर है कि सुरंग में पानी और मलबे के स्रोत की स्थिति क्या है और सुरक्षा जांच के बाद निर्माण कार्य दोबारा कब शुरू किया जाएगा।
फिलहाल परियोजना की सुरंग में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए काम बंद है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
