Uttarakhand
उत्तरकाशी में कूड़ा निस्तारण को लेकर प्रदर्शन हुआ तेज़, जल समाधि के फैसले से प्रशासन की बड़ी मुश्किलें
उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में प्रशासन में आंदोलनकारियों के जल समाधि का फैसला लेते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। एक महीने से तांबाखानी से नगर का कूड़ा हटाने की मांग को लेकर आंदोलनकारियों धरने पर बैठे हैं। जिसके बाद कल प्रदर्शन करियों के सब्र का बांध टूट पड़ा।
उत्तरकाशी, तांबाखानी में कूड़ा निस्तारण को लेकर विरोध हुआ तेज़
आंदोलनकारी संतोष सेमवाल ने प्रशासन और पालिका की ओर से सुनवाई न होने गंगा में जलसमाधि लेने का निर्णय लिया। जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर आंदोलनकारियों को रोक दिया. आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वह आंदोलन जारी रखेंगे।
दरअसल, उत्तरकाशी तांबाखानी में कूड़ा लोगों के लिए सिरदर्द बन चुका है। जिसको लेकर प्रदर्शनकारी लम्बे समय से आंदोलनरत हैं। इसी कड़ी में सोमवार को कूड़ा निस्तारण की मांग कर रहे आंदोलनकारियों ने शासन प्रशासन और पालिका के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया
आंदोलनकारियों के जल समाधि के फैसले पर प्रशासन की बड़ी मुश्किलें
जिसके बाद पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत संतोष सेमवाल जलसमाधि लेने के लिए अपने साथियों विष्णुपाल रावत, गोपीनाथ रावत आदि के साथ रवाना हुए। साईं मंदिर के पास पहुंचते ही उनको पुलिस ने रोककर नगरपालिका से बातचीत करने को कहा। लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने तो उनकी पुलिस के साथ नोकझोंक हुई। आंदोलनकारियों के भावुक होने के बाद पुलिस ने उन्हें मणिकर्णिका घाट पर बातचीत के लिए बुलाया।
मांगों की अनदेखी का लगाया आरोप
उन्होंने बताया कि वो काफी समय से कूड़े के नियमित निस्तारण और तांबाखानी क्षेत्र से कचरा हटाने की मांग उठा रहे हैं। पालिका प्रशासन द्वारा लगातार उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। इसी कारण उन्हें ये कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
मामला गरमाने पर नगर पालिका अध्यक्ष पहुंचे मौके पर
इसी बीच नगरपालिका अध्यक्ष भूपेंद्र चौहान मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से बात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि मंगलवार को कार्यकारी अधिकारी द्वारा लिखित रूप में यह दिया जाएगा कि कूड़ा हटाने की प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि कूड़ा हटाने का कार्य पहले से ही जारी है। लेकिन ये 10 सालों का जमा कूड़ा है इसलिए ज्यादा वक्त लग रहा है।
आश्वासन मिलने के बाद, आंदोलनकारियों ने प्रस्तावित जल समाधि कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित कर दिया और धरनास्थल पर लौट आए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर गंभीरता से अमल नहीं किया गया, तो वे आगे चलकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
