चंपावत : उत्तराखंड के पहाड़ों में पलायन की चुनौती के बीच चम्पावत में कीवी की खेती को रोजगार और खुशहाली का नया आधार बनाने की तैयारी तेज हो गई है। अब खेती केवल गुजारे का जरिया नहीं, बल्कि पहाड़ के युवाओं को गांव में ही रोजगार देने और किसानों की आर्थिक तस्वीर बदलने का माध्यम बने, इसी सोच के साथ जिला मुख्यालय में कीवी महोत्सव एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कीवी महोत्सव और प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में आयोजित महोत्सव का शुभारंभ जिलाधिकारी मनीष कुमार और दर्जा राज्य मंत्री रामपाल सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में साफ संदेश दिया गया कि चम्पावत की अनुकूल जलवायु को देखते हुए कीवी उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ावा देकर जनपद को कीवी उत्पादन के हब के रूप में विकसित किया जाएगा। जिलाधिकारी मनीष कुमार के मुताबिक, जिला योजना के तहत करीब दो करोड़ रुपये की धनराशि से इस वर्ष 24 एकड़ क्षेत्र में कीवी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन चुनौती सिर्फ उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, इसके लिए पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन, निर्यात और प्रसंस्करण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिलाधिकारी ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ कीवी, सेब और मौनपालन जैसी गतिविधियों को अपनाने की अपील की।
चम्पावत जिले को कीवी हब बनाने की तैयारी
जिलाधिकारी ने कहा कि चम्पावत की जलवायु कीवी के लिए अनुकूल है और जंगली जानवरों से अपेक्षाकृत कम नुकसान होने के कारण यह पर्वतीय किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर विकल्प बन सकता है। VO-2 वहीं दर्जा राज्य मंत्री रामपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय बढ़ाने और गांवों में स्वरोजगार के अवसर विकसित करने के लिए प्रयासरत है। बागवानी और कृषि को लाभकारी बनाकर ही रिवर्स पलायन की राह मजबूत की जा सकती है। महोत्सव में उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से पहुंचे प्रगतिशील किसानों और विशेषज्ञों ने कीवी उत्पादन की आधुनिक तकनीक, बागान प्रबंधन, मृदा एवं जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, निर्यात और मूल्य संवर्धन की जानकारी साझा की। कीवी मैन के नाम से पहचान रखने वाले भवान सिंह कोरंगा ने किसानों को खेती के व्यावहारिक गुर बताए।