Uttarakhand
अगले साल रक्षाबंधन से 15 दिन पहले शुरू होगा उत्सव
हरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ के तहत उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने महिला समूहों द्वारा तैयार राखियों और अन्य स्थानीय उत्पादों का अवलोकन किया और प्रदेश के सभी जिलों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ी महिलाओं से संवाद किया।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष से रक्षाबंधन के 15 दिन पहले ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव’ शुरू किया जाएगा। इसे पखवाड़े के रूप में आयोजित किया जाएगा, ताकि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए अधिक समय और बेहतर बाजार मिल सके।
4,480 स्टॉल से 12.50 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के 95 विकासखंडों में 4,480 स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉलों के माध्यम से करीब 12.50 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई है।
उन्होंने कहा कि बाजार और अवसर मिलने पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं।
70 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूह सक्रिय
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं, जिनसे 5 लाख 20 हजार से अधिक ग्रामीण परिवार जुड़े हैं। इन समूहों को मजबूत करने के लिए 8 हजार से ज्यादा ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन भी काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं के स्थानीय उत्पादों को गांव और घर तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है।
3 लाख से ज्यादा महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रदेश में 3 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
अब ‘सशक्त बहना उत्सव’ का विस्तार कर इसे ‘सशक्त बहना बाजार’ के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके जरिए महिला समूहों के उत्पादों को पर्यटन स्थलों, धार्मिक यात्रा मार्गों, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और होटल-रिसॉर्ट तक पहुंचाने की योजना है।
उत्पादों की मार्केटिंग पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री और मार्केटिंग को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 49 ग्रोथ सेंटर, 17 सरस सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 8 बेकरी यूनिट स्थापित की गई हैं।
इसके अलावा यात्रा मार्गों पर 110 बिक्री केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। सचिवालय समेत विभिन्न स्थानों पर स्थायी बिक्री केंद्र और राज्य स्तरीय सरस मेलों के जरिए भी इन उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से लोकल उत्पादों को ग्लोबल पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है। महिलाओं को गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग, डिजिटल भुगतान और मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों से खरीदारी करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना ही ‘वोकल फॉर लोकल’ की वास्तविक भावना है। इससे महिला समूहों के हुनर और मेहनत को सम्मान मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं परिवार के साथ खेती, पशुपालन और विभिन्न आजीविका गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अब वे अपने कौशल और उद्यमशीलता के जरिए सफल उद्यमी के रूप में भी आगे बढ़ रही हैं।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मजबूत बाजार उपलब्ध कराना और उनके उत्पादों को राज्य से बाहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव झरना कमठान, अनुराधा पाल, मुख्य विकास अधिकारी देहरादून अभिनव शाह समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।